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Paisa aur Khushi: Mithak ya Vaastavikata

AKA: पैसा और खुशी: मिथक या वास्तविकता
Author(s): Dr. Vijay Singh Raghav
400

  • Language:
  • Hindi
  • ISBN13:
  • 9789369260386
  • ISBN10:
  • 9369260382
  • Format:
  • Hardcover
  • Trim:
  • 6x9
  • Pages:
  • 118
  • Publication date:
  • 18-Sep-2025

  •   Available, Ships in 3-5 days
  •   10 Days Replacement Policy

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“पैसा और खुशी: मिथक या वास्तविकता” धन और सुख के बीच जटिल संबंध की पड़ताल करती है। यह पुस्तक यह समझने में मदद करती है कि क्या वास्तव में पैसा खुशियाँ लाता है या संतोष भीतर से आता है। वास्तविक जीवन के उदाहरणों, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यावहारिक विचारों के माध्यम से, पाठकों को यह जानने में मार्गदर्शन मिलता है कि कैसे वित्तीय स्थिरता, व्यक्तिगत मूल्य और भावनात्मक बुद्धिमत्ता मिलकर पूर्ण जीवन की अनुभूति बनाते हैं। यह पुस्तक सामान्य धारणाओं को चुनौती देती है, सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती है और संतुलित, सार्थक जीवन की दिशा दिखाती है।

Dr. Vijay Singh Raghav

Dr. Vijay Singh Raghav

डॉ. विजय सिंह राघव का जन्म 3 मार्च 1957 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के कस्बा बहजोई में हुआ था। वर्तमान में वे बरेली, उत्तर प्रदेश में निवास कर रहे हैं। उन्होंने अपनी स्नातकोत्तर शिक्षा एम.जे.पी. रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली से और पीएचडी कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से प्राप्त की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से दूर शिक्षा में डिप्लोमा अर्जित किया। डॉ. राघव ने उत्तरांचल और उत्तर प्रदेश के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य किया और उच्च शिक्षा विभाग में प्राचार्य और उच्च शिक्षा अधिकारी के रूप में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य किया।

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